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एम के मुथु का निधन: तमिलनाडु के सिनेमा जगत का एक युग समाप्त

करुणानिधि के ज्येष्ठ पुत्र और स्टालिन के बड़े भाई का चेन्नई में निधन, फिल्मों में अनूठी पहचान बनाई

एम के मुथु का निधन: तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा जगत के लिए शनिवार का दिन एक दुखद खबर लेकर आया। पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि के ज्येष्ठ पुत्र और वर्तमान मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के बड़े भाई एम के मुथु का 77 वर्ष की आयु में चेन्नई में निधन हो गया। उनका निधन द्रविड़ राजनीति के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और तमिल सिनेमा के एक प्रतिभाशाली कलाकार के जाने का प्रतीक है।

एम के मुथु का निधन: स्टालिन का भावुक संदेश

अपने बड़े भाई के निधन की खबर साझा करते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा, “मुतमिल अरिग्नर कलैगनर परिवार के सबसे बड़े बच्चे, मेरे प्यारे बड़े भाई एम के मुथु के निधन की खबर ने आज सुबह मुझे बिजली के झटके की तरह हिला दिया है। अपने प्यारे भाई को खोने का दुख, जिसने मुझे मां-बाप के बराबर स्नेह दिया, मुझे पीड़ा दे रहा है।”

स्टालिन ने आगे कहा, “हमारे पिता मुथुवेलर ने उन्हें अपनी याद में एम के मुथु नाम दिया था, जैसा कि नेता कलैगनर ने तय किया था। कलैगनर की तरह, भाई मुथु ने भी युवावस्था से ही नाटकों के माध्यम से द्रविड़ आंदोलन की सेवा शुरू की थी।”

सिनेमा जगत में अमिट छाप

एम के मुथु ने 1970 में फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश किया और अपनी पहली ही फिल्म में दोहरी भूमिका निभाई। स्टालिन ने अपने भाई की सिनेमाई उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा, “पिल्लईयो पिल्लै, पूक्कारी, समयलकरन और अनैया विलक्कू जैसी फिल्मों के माध्यम से भाई एम के मुथु ने तमिलनाडु के दर्शकों के दिलों में स्थायी रूप से अपनी जगह बना ली।”

स्टालिन ने कहा “उनकी अभिनय, संवाद अदायगी और बॉडी लैंग्वेज में एक अनूठी शैली थी। ऐसी प्रतिभा और उत्साह के कारण वे 1970 में फिल्म इंडस्ट्री में दाखिल हुए। अपनी पहली ही फिल्म में उन्होंने दोहरी भूमिका निभाई,”।

संगीत की दुनिया में भी प्रतिभा

एम के मुथु की एक विशेषता यह भी थी कि वे अपनी आवाज में मधुर गीत गा सकते थे। स्टालिन ने कहा, “उनके पास एक दुर्लभ विशेषता थी जो कई अभिनेताओं के पास नहीं थी। उनमें अपनी आवाज में मधुर गीत गाने की क्षमता थी। ‘नागूर आंदावा, जो एक अच्छे दिल में रहता है’ और ‘मेरे पास बहुत रिश्तेदार हैं’ जैसे गीत आज भी कई लोगों के लिए अविस्मरणीय हैं।”

व्यक्तिगत रिश्ते और पारिवारिक बंधन

अपने व्यक्तिगत रिश्ते के बारे में बात करते हुए स्टालिन ने भावुक होकर कहा, “वे हमेशा मेरे प्रति स्नेह दिखाते थे, मेरी वृद्धि को अपनी मानते थे, और लगातार मेरा उत्साहवर्धन करते थे। जब भी मैं उन्हें देखने जाता था, वे प्रेम के साथ पुरानी यादें साझा करने की आदत बना चुके थे।”

“यद्यपि वे बुढ़ापे के कारण चल बसे हैं, भाई एम के मुथु अपने प्रेम के माध्यम से हमारे दिलों में, अपनी कला और गीतों के माध्यम से लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जीवित रहेंगे। मैं अपने प्यारे भाई को दिल से प्रेम के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”

पारिवारिक पृष्ठभूमि और विरासत

एम के मुथु का जन्म करुणानिधि की पहली पत्नी पद्मावती से हुआ था, जो अभिनेता-गायक चिदंबरम एस जयरामन की बहन थीं। यह पारिवारिक संबंध तमिल सिनेमा और संस्कृति से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

द्रविड़ आंदोलन में योगदान

एम के मुथु केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि द्रविड़ आंदोलन के एक सक्रिय सदस्य भी थे। उन्होंने अपने पिता करुणानिधि की तरह राजनीतिक और सामाजिक कारणों के लिए काम किया। नाटकों के माध्यम से उन्होंने द्रविड़ विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तमिल सिनेमा में अनूठी पहचान

1970 के दशक में तमिल सिनेमा में प्रवेश करने वाले एम के मुथु ने अपनी विशिष्ट अभिनय शैली से दर्शकों का दिल जीता। उनकी फिल्में न केवल मनोरंजन का साधन थीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी देती थीं। उनकी फिल्मों में द्रविड़ संस्कृति और मूल्यों की झलक मिलती थी।

अभिनय में निपुण थे

एम के मुथु की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे न केवल अभिनय में निपुण थे बल्कि गायन में भी उत्कृष्ट थे। यह क्षमता उस दौर के बहुत कम अभिनेताओं में देखने को मिलती थी। उनके गाए गीत आज भी तमिल संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।

तमिलनाडु के लिए एक बड़ी क्षति

एम के मुथु का निधन न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे तमिलनाडु के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने कैरियर के दौरान जो काम किया, वह तमिल संस्कृति और सिनेमा की समृद्ध परंपरा का हिस्सा है। उनकी फिल्में और गीत भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

एम के मुथु का 77 साल की उम्र में निधन: भाई स्टालिन के राजनीतिक करियर को समर्थन दिया था

करुणानिधि परिवार में जन्मे एम के मुथु ने हमेशा अपने पिता और छोटे भाई स्टालिन के राजनीतिक करियर को समर्थन दिया। यद्यपि वे सक्रिय राजनीति में नहीं थे, लेकिन द्रविड़ आंदोलन के सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा अटूट थी।

एम के मुथु का निधन तमिलनाडु के सिनेमा जगत और द्रविड़ राजनीति के एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व के जाने का प्रतीक है। 77 साल की उम्र में उन्होंने एक समृद्ध विरासत छोड़ी है जिसमें उनकी फिल्में, गीत और सामाजिक योगदान शामिल हैं। उनके बड़े भाई के रूप में स्टालिन के लिए यह व्यक्तिगत नुकसान है, जबकि तमिल समाज के लिए यह एक कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता की हानि है।

उनकी स्मृति में हम यह कह सकते हैं कि एम के मुथु ने अपने जीवन में जो भी काम किया, वह गुणवत्ता और प्रतिबद्धता से भरा था। उनका जाना एक युग के अंत का प्रतीक है, लेकिन उनकी कृतियां और योगदान हमेशा याद रखे जाएंगे।


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