बेंगलुरु, 14 अगस्त 2025 | न्यूज़ का स्टोर डेस्क
धर्मस्थल सामूहिक दफन कांड में एक अहम गवाह ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि उन्होंने खुद 13 में से केवल एक ही स्थान पर 70 से 80 शव दफनाए थे। गवाह के अनुसार, ये शव ज्यादातर यौन शोषण पीड़ित महिलाओं और बच्चों के थे, जिन्हें बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड या अनुमति के जंगलों और सुनसान सड़कों पर दफनाया जाता था।
गवाह, जो पहले धर्मस्थल मंदिर प्रशासन में सफाईकर्मी के रूप में कार्यरत थे, ने दावा किया कि दफनाने के आदेश सीधे मंदिर प्रबंधन से मिलते थे। शवों को हमेशा ऐसे स्थानों पर दफनाया जाता था जहाँ लोगों की नजर न पड़े — जैसे जंगल के अंदरूनी हिस्से या पुराने, बंद पड़े रास्ते।
उनके अनुसार, दफनाए गए शवों में कई महिलाएं और बच्चे भी थे। उन्होंने बताया कि इन शवों का न तो पोस्टमार्टम हुआ, न ही पुलिस में कोई केस दर्ज किया गया।
यह खुलासा सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग तेज़ कर दी है। उनका कहना है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह देश के सबसे बड़े मानवाधिकार उल्लंघनों में से एक होगा।
कर्नाटक सरकार ने कहा है कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच होगी। पुलिस ने गवाह के बयान को रिकॉर्ड में शामिल कर लिया है और सभी कथित दफन स्थलों की पहचान की जा रही है।
संपादकीय दृष्टिकोण:
यह मामला सिर्फ अपराध का नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करना अब सरकार और जांच एजेंसियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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