शिमला में डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर 5.9 करोड़ की ठगी

साइबर अपराधियों के जाल में फंसे शिमला के निवासी, केवल 33 लाख रुपए वापस मिले


मुख्य बातें एक नजर में:

  • 12 मामले दर्ज: 2024-25 में शिमला में डिजिटल गिरफ्तारी के 12 केस
  • कुल नुकसान: 5.91 करोड़ रुपए की ठगी
  • वसूली: अब तक केवल 33 लाख रुपए बरामद
  • सबसे बड़ा केस: एक पिता ने बेटे को बचाने के लिए 93 लाख रुपए गंवाए

क्या है डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला?

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में साइबर अपराधियों का एक नया जाल फैला है। अपराधी खुद को पुलिस, CBI या आयकर विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को “डिजिटल गिरफ्तारी” के नाम पर डराते हैं और करोड़ों रुपए की ठगी कर रहे हैं।

राज्य CID साइबर क्राइम के सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस दिनेश कुमार के अनुसार, 2024 और 2025 में अब तक 12 ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें कुल 5.91 करोड़ रुपए की ठगी हुई है।


चौंकाने वाले मामले

केस 1: आयकर रेड के डर से 38 लाख की हानि

एक व्यक्ति को फोन आया जिसमें कॉलर ने खुद को आयकर अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि उसके खाते में 6 करोड़ रुपए जमा हुए हैं और आयकर टीम उसके घर आ रही है। तीन दिन तक डिजिटल गिरफ्तारी में रखकर अपराधियों ने उससे 38 लाख रुपए ऐंठे।

केस 2: बेटे को बचाने के चक्कर में 93 लाख का नुकसान

सबसे दिल दहला देने वाला मामला एक पिता का है जिसे फोन करके बताया गया कि उसका बेटा रेप केस में फंसा है और उसका फोन बंद है। डर और चिंता का फायदा उठाकर अपराधियों ने उससे 93 लाख रुपए हड़प लिए।


अपराधियों की चाल कैसे काम करती है?

1. फर्जी पहचान

  • पुलिस, CBI, आयकर या न्यायालय का अधिकारी बनकर फोन करते हैं
  • वर्दी पहनकर वीडियो कॉल करते हैं
  • फर्जी आईडी कार्ड दिखाते हैं

2. डर का माहौल

  • फर्जी नोटिस भेजते हैं
  • कोर्ट, पुलिस के नाम से व्हाट्सऐप मैसेज करते हैं
  • ऑफिस जैसा बैकग्राउंड बनाते हैं

3. पैसे निकलवाने की ट्रिक

  • मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाते हैं
  • फर्जी पार्सल केस बनाते हैं
  • तुरंत पैसे ट्रांसफर करने का दबाव डालते हैं

पुलिस की सलाह – खुद को कैसे बचाएं?

तुरंत करें:

  1. अनजान नंबर का जवाब न दें
  2. डर के कारण पैसे ट्रांसफर न करें
  3. तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन को सूचित करें
  4. नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें
  5. परिवारजनों को इस घोटाले के बारे में बताएं

याद रखें:

  • सरकारी अधिकारी कभी भी फोन पर पैसे नहीं मांगते
  • डिजिटल गिरफ्तारी जैसी कोई चीज़ नहीं होती
  • संदेह होने पर फैमिली या दोस्तों से सलाह लें

क्यों कम हो रही है रिकवरी?

SP दिनेश कुमार के अनुसार, पैसों की वसूली कम इसलिए हो रही है क्योंकि पीड़ित बहुत देर से पुलिस के पास आते हैं। तब तक अपराधी पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर चुके होते हैं।

5.91 करोड़ में से अब तक केवल 33 लाख रुपए ही वापस मिले हैं – यह आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।


अगर आप भी हो गए हैं शिकार तो क्या करें?

  1. तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन जाएं
  2. सभी कॉल रिकॉर्डिंग और मैसेज सेव करें
  3. बैंक को तुरंत सूचित करें
  4. ट्रांजेक्शन डिटेल्स इकट्ठा करें
  5. साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराएं

सावधान रहें, सुरक्षित रहें

डिजिटल गिरफ्तारी घोटाला आज के समय की एक गंभीर समस्या है। जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा इलाज है। किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर भरोसा न करें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें।

याद रखें: आपकी सावधानी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।


यह न्यूज़ रिपोर्ट PTI की जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। साइबर क्राइम से बचने के लिए हमेशा सतर्क रहें।

हेल्पलाइन नंबर: 1930 (नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन)

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✍️ यह लेख News Ka Store की संपादकीय टीम द्वारा लिखा गया है। हमारा उद्देश्य आपको निष्पक्ष, सटीक और उपयोगी जानकारी देना है।

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