50 साल बाद भी ‘शोले’ का जलवा बरकरार

1975 में रिलीज़ हुई रमेश सिप्पी की कल्ट फिल्म शोले आज अपनी 50वीं सालगिरह मना रही है, लेकिन इसके डायलॉग्स और किरदार आज भी भारतीय पॉप कल्चर में जिंदा हैं।

गब्बर सिंह का डर, जय-वीरू की दोस्ती और बसंती की मस्ती – ये सब न सिर्फ फिल्मों में बल्कि विज्ञापनों, मीम्स और ब्रांडिंग में भी बार-बार दिखते हैं।
“अरे ओ सांभा, कितने आदमी थे?” से लेकर “ये हाथ नहीं, फांसी का फंदा है” तक, सलिम-जावेद द्वारा लिखे गए डायलॉग आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं।

मीम्स से लेकर ब्रांडिंग तक ‘शोले’

सोशल मीडिया मीम्स ने शोले को नई पीढ़ी तक पहुंचा दिया है।
थाकुर और गब्बर पर बने मीम्स राजनीति, क्रिकेट, लव लाइफ से लेकर मंडे ब्लूज़ तक हर जगह फिट बैठते हैं।
ब्रांड्स ने भी ‘शोले’ के मैजिक का फायदा उठाया है –

  • Coca-Cola ने 2023 में Basanti’s Orange लिमिटेड एडिशन कैन लॉन्च किया
  • Airtel के #KitneAadmiThe चैलेंज में सिर्फ 72 घंटे में 12,000 से ज्यादा वीडियो बने
  • गब्बर के डायलॉग्स पर बने बिस्किट और टीवी ऐड आज भी यादगार हैं

पहला विज्ञापन आइकन बना गब्बर

1976 में Britannia Glucose-D के ऐड में अमजद ख़ान ने गब्बर का रोल दोहराया।
यह ऐड इतना पॉपुलर हुआ कि गब्बर हिंदी सिनेमा का पहला विज्ञापन आइकन बन गया।
उसके बाद Maggi, Clinic Plus, Alpenliebe, Bajaj जैसे कई ब्रांड्स ने ‘शोले’ से इंस्पिरेशन ली।

सरकारी कैंपेन में भी ‘शोले’

मतदान से लेकर स्वच्छता अभियान तक, सरकारी ऐड्स में भी ‘शोले’ के लुक-अलाइक किरदार नज़र आए।
2014 में जब फिल्म का 3D री-रिलीज़ हुआ, अमूल ने जय-वीरू और बसंती को 3D ग्लासेस में दिखाकर एक मजेदार ऐड बनाया।

50 साल बाद भी, ‘शोले’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारत की पॉप कल्चर पहचान है – और आने वाले सालों में भी इसका जलवा कम होने वाला नहीं।

Picture of News Ka Store Team

News Ka Store Team

✍️ यह लेख News Ka Store की संपादकीय टीम द्वारा लिखा गया है। हमारा उद्देश्य आपको निष्पक्ष, सटीक और उपयोगी जानकारी देना है।

Leave a Comment