हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में रविवार को हुई भारी बारिश के कारण कई मुख्य सड़कें 12 घंटे से अधिक समय तक यातायात के लिए बंद रहीं। शिमला-चोपाल मार्ग पर विशालकाय देवदार के पेड़ों के गिरने से स्थिति और भी गंभीर हो गई, जिससे हजारों यात्री और स्थानीय लोग घंटों तक फंसे रहे।
हिमाचल प्रदेश के जिला प्रशासन के अनुसार, शनिवार देर रात से शुरू हुई तेज़ बारिश के कारण शिमला-चोपाल मार्ग पर कम से कम दो दर्जन बड़े पेड़ सड़क पर गिर गए। इन विशालकाय देवदार के पेड़ों का व्यास 3-4 फुट तक था, जिन्होंने पूरी सड़क को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऐसी प्राकृतिक आपदाओं में तत्काल राहत कार्य शुरू करना आवश्यक होता है। शिमला के उपायुक्त आदित्य नेगी ने बताया कि रात 2 बजे से ही प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं और चेनसॉ मशीनों की मदद से पेड़ों को काटने का काम शुरू किया।
शिमला नगर निगम के मुख्य अभियंता राकेश शर्मा ने इस घटना पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भारी बारिश के कारण मिट्टी नरम हो गई थी, जिससे जड़ों की पकड़ कमजोर हो गई और पुराने देवदार के पेड़ हवा के तेज झोंकों के साथ गिर गए। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र भू-स्खलन के लिए अतिसंवेदनशील है और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून के दौरान इस तरह की घटनाएं आम हैं। “हमारी टीम ने 6 घंटे लगातार काम करके मुख्य सड़क को साफ किया, लेकिन बारिश जारी रहने के कारण काम में देरी हुई,” शर्मा ने कहा।
स्थानीय निवासी और दुकानदार मनोज कुमार ने बताया कि रविवार सुबह जब वे दुकान खोलने गए तो देखा कि पूरा रास्ता पेड़ों से भरा हुआ था। “30 साल से यहां रह रहा हूं, लेकिन इतने बड़े पेड़ों को एक साथ गिरते नहीं देखा। सुबह 6 बजे से दोपहर 2 बजे तक कोई गाड़ी नहीं गुजर सकी,” उन्होंने कहा। चोपाल के रहने वाले सरकारी कर्मचारी विनोद शर्मा बताते हैं कि वे रविवार सुबह शिमला जाने के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में 8 घंटे फंसे रहे। “बच्चों को स्कूल जाना था, लेकिन इस तरह की प्राकृतिक आपदा के कारण उन्हें घर ही रहना पड़ा।”
हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम (एचआरटीसी) के क्षेत्रीय प्रबंधक सुरेश ठाकुर ने बताया कि शिमला-चोपाल मार्ग पर रोजाना 40-50 बसें चलती हैं, जिनमें से अधिकतर को रविवार को रद्द करना पड़ा। “हमने यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों की जानकारी दी और जिन यात्रियों के टिकट रद्द हुए, उन्हें पूर्ण रिफंड की व्यवस्था की,” ठाकुर ने कहा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, इस मार्ग पर प्रतिदिन 5,000 से अधिक यात्री आवागमन करते हैं।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के शिमला केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र पॉल ने बताया कि पिछले 24 घंटों में शिमला में 67 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 40% अधिक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगले 48 घंटों में भी भारी बारिश की संभावना है। “मानसून की यह दूसरी लहर है और हमने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट जारी किया है,” डॉ. पॉल ने कहा। क्लाइमेट चेंज की वजह से हिमाचल में अचानक होने वाली भारी बारिश के मामले बढ़े हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी अजय वर्मा ने सड़क सुरक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि शिमला-चोपाल मार्ग को अपग्रेड करने का काम चल रहा है। “हमने पहाड़ी इलाकों के लिए विशेष ड्रेनेज सिस्टम बनवाया है और सड़कों के किनारे रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया गया है ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके,” वर्मा ने कहा। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत खतरनाक मोड़ों को सीधा किया जा रहा है और सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है।
स्थानीय पर्यटन उद्योग पर भी इस घटना का प्रभाव पड़ा है। शिमला होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय स्वर्ण ने बताया कि रविवार को लगभग 200 पर्यटकों को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। “मानसून के समय में ऐसी घटनाएं पर्यटन व्यवसाय को प्रभावित करती हैं, लेकिन हम प्रकृति के सामने असहाय हैं,” स्वर्ण ने कहा। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के आंकड़ों के अनुसार, मानसून के दौरान पर्यटकों की संख्या में 30% की कमी आ जाती है।
वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक अनिल शर्मा ने पेड़ों के गिरने के संबंध में तकनीकी विश्लेषण प्रस्तुत करते हुए कहा कि 80-100 साल पुराने देवदार के पेड़ों की जड़ें उथली होती हैं। “भारी बारिश के कारण मिट्टी संतृप्त हो जाती है और पेड़ों की स्थिरता कम हो जाती है। हमने खतरनाक पेड़ों की पहचान का अभियान शुरू किया है,” शर्मा ने कहा। उन्होंने बताया कि वन विभाग ने सड़कों के किनारे के पुराने और कमजोर पेड़ों की सूची तैयार की है।
दोपहर 2 बजे तक राहत कार्य के बाद शिमला-चोपाल मार्ग पर एकतरफा यातायात शुरू हो गया। जिला प्रशासन ने घोषणा की कि सड़क को पूरी तरह से साफ करने का काम जारी है और अगले कुछ घंटों में सामान्य यातायात बहाल हो जाएगा। उपायुक्त नेगी ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम की जानकारी लेकर ही घर से निकलें। आपदा प्रबंधन के तहत 24×7 हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है जहां लोग तत्काल सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।





