Elon Musk ने बनाई (America Part )अमेरिका पार्टी
अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित मोड़ आया है। मशहूर टेक अरबपति Elon Musk ने America Party बनाने की घोषणा 3 जुलाई को कर दी । “अमेरिका पार्टी” (America Party) बनाने के कदम को अमेरिका की दो-दलीय प्रणाली—डेमोक्रेट और रिपब्लिकन पार्टियों—के खिलाफ एक सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप से टकराव और विवादित बिल
एलन मस्क और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच तनाव तब बढ़ा जब ट्रंप ने विवादित बजट बिल “वन बिग ब्यूटीफुल बिल” (One Big Beautiful Bill) पर हस्ताक्षर किए। मस्क ने इस बिल की सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए कहा कि यह बिल अगले 10 वर्षों में $3.4 ट्रिलियन का घाटा बढ़ा देगा और टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी है।
मस्क, जो कभी ट्रंप के समर्थक थे और ट्रंप प्रशासन में “Department of Government Efficiency” के प्रमुख थे, अब उनके कट्टर आलोचक बन गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा: “अगर यह आखिरी काम भी हुआ, तो मैं उन सभी नेताओं को हराऊँगा जिन्होंने इस बिल का समर्थन किया है।”
ट्विटर पोल से जन्मी पार्टी
4 जुलाई को मस्क ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक पोल कराया, जिसमें पूछा गया कि क्या अमेरिका को दो-दलीय सिस्टम से बाहर निकलना चाहिए? 12 लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें से लगभग 66% ने “हाँ” कहा। इसके अगले ही दिन, 5 जुलाई को मस्क ने America Party की घोषणा कर दी।
मस्क की योजना क्या है?
हालांकि मस्क फिलहाल राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के मूड में नहीं दिख रहे, लेकिन उन्होंने साफ किया कि अमेरिका पार्टी 2026 के मिडटर्म इलेक्शंस में 2-3 सीनेट सीटों और 8-10 हाउस जिलों को टारगेट करेगी। मकसद है – ऐसे चुनावी क्षेत्र चुनना जो नाजुक हैं और जहां अमेरिका पार्टी “किंगमेकर” की भूमिका निभा सकती है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति ट्रंप ने पलटवार करते हुए मस्क की कंपनियों को दी जाने वाली फेडरल सब्सिडी बंद करने की धमकी दी है। यहां तक कि ट्रंप ने मस्क की नागरिकता रद्द करने या उन्हें देश से बाहर निकालने तक की बात कही, जबकि मस्क 2002 से अमेरिका के नागरिक हैं।
चुनौती बड़ी है
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका में नई पार्टी बनाना बेहद कठिन काम है। हर राज्य के बैलेट एक्सेस लॉ अलग होते हैं, और एक मजबूत राष्ट्रीय चुनावी ढांचा खड़ा करने में वर्षों लगते हैं। लेकिन एलन मस्क की वित्तीय ताकत और ऑनलाइन फॉलोइंग को देखते हुए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।





