यूक्रेन संघर्ष, सुरक्षा और वैश्विक मुद्दों पर होगी पुतिन-ट्रंप के बीच व्यापक चर्चा
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि मास्को अलास्का में होने वाले राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच शिखर सम्मेलन में अपनी स्पष्ट नीति प्रस्तुत करेगा। यह ऐतिहासिक बैठक यूक्रेन संघर्ष, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य दबाव वाले वैश्विक मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। रूसी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, लावरोव ने अलास्का पहुंचने पर रोसिया-24 टेलीविजन चैनल को बताया कि “हम कोई विशेष योजना नहीं बना रहे हैं। हमारे पास तर्क हैं, एक स्पष्ट और समझने योग्य स्थिति है।” उन्होंने आगे कहा कि वे अपने तर्कों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेंगे और इस महत्वपूर्ण राजनयिक पहल के माध्यम से दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।
रूसी विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की रूस यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण आधारभूत कार्य किया गया है। लावरोव ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कल हम इस बेहद उपयोगी बातचीत को जारी रख सकेंगे।” यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि दोनों पक्षों ने इस शिखर सम्मेलन की तैयारी में काफी समय और मेहनत लगाई है। विटकॉफ की रूस यात्रा के दौरान जो प्रारंभिक चर्चाएं हुई थीं, उन्होंने इस बैठक के लिए एक ठोस आधार तैयार किया है। रूसी अधिकारियों का मानना है कि यह पूर्व तैयारी इस शिखर सम्मेलन को और भी अधिक प्रभावी बनाएगी और दोनों नेताओं के बीच एक रचनात्मक संवाद की संभावना को बढ़ाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच यह महत्वपूर्ण मुलाकात अलास्का की राजधानी एंकरेज में शुक्रवार को होने वाली है। रूसी राष्ट्रपतीय सहायक यूरी उशाकोव ने बताया कि यह बैठक पहले एक निजी सत्र के रूप में शुरू होगी जिसमें केवल दो नेता और उनके दुभाषिए शामिल होंगे। इसके बाद विस्तारित वार्ता होगी जिसमें दोनों पक्षों से पांच-पांच प्रतिनिधि भाग लेंगे। शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उशाकोव ने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ता का मुख्य फोकस यूक्रेन संकट के समाधान पर होगा। साथ ही “शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के व्यापक कार्यों और वर्तमान एवं सबसे दबाव वाले अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों” पर भी चर्चा होगी। यह संरचित दृष्टिकोण दर्शाता है कि दोनों पक्ष इस बैठक को गंभीरता से ले रहे हैं और व्यापक मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय निकालने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को फॉक्स न्यूज रेडियो को दिए गए एक साक्षात्कार में अपनी पुतिन के साथ होने वाली बैठक के बारे में काफी यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अनुमान लगाया कि अलास्का में होने वाली इस आगामी बैठक के सफल न होने की 25 प्रतिशत संभावना है। ट्रंप ने कहा कि पुतिन के साथ उनकी यह बैठक “शतरंज के खेल” की तरह है। उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि उनका मानना है कि पुतिन रूस-यूक्रेन संघर्ष पर एक समझौते तक पहुंचने की दिशा में प्रगति करने के लिए आ रहे हैं। ट्रंप की यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि वे इस बैठक को एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं जिसमें सावधानीपूर्वक कदम उठाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने आगे कहा कि यदि बैठक के दौरान सकारात्मक प्रगति होती है, तो यह दूसरी बैठक की आधारशिला रखेगी, जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की भी शामिल होंगे।
इससे पहले बुधवार को ट्रंप ने एक कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि पुतिन यूक्रेन के साथ चल रहे संघर्ष में युद्धविराम पर सहमति देने से इनकार करते हैं तो रूस को “बहुत गंभीर परिणामों” का सामना करना पड़ेगा। यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति की इस बैठक के प्रति गंभीर दृष्टिकोण को दर्शाती है और यह स्पष्ट करती है कि वे इस मुलाकात को केवल एक औपचारिक राजनयिक मुलाकात नहीं मानते बल्कि एक निर्णायक अवसर के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप का यह रुख यह संकेत देता है कि अमेरिका इस बैठक में कोई समझौता करने के मूड में नहीं है और वे स्पष्ट परिणाम चाहते हैं। यह द्विपक्षीय कूटनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू है जहां दबाव और प्रोत्साहन दोनों का उपयोग बातचीत की मेज पर किया जाता है।
यह शिखर सम्मेलन न केवल द्विपक्षीय संबंधों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यूक्रेन संघर्ष जो दो वर्षों से अधिक समय से जारी है, ने न केवल यूरोपीय सुरक्षा को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिति पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है। इस पृष्ठभूमि में अलास्का शिखर सम्मेलन का परिणाम न केवल रूस और अमेरिका के लिए बल्कि पूरी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण होगा। दुनिया भर के राजनयिक विशेषज्ञ और विश्लेषक इस बैठक के परिणामों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि यह यूक्रेन संकट के भविष्य की दिशा तय कर सकती है और वैश्विक शांति एवं स्थिरता में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।
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