नई दिल्ली: चुनाव आयोग (EC) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है। आज चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के एक और दावे की जांच करके उसे गलत बताया है और सबूत मांगे हैं।
बृहस्पतिवार को राहुल गांधी ने एक प्रेजेंटेशन में बताया था कि 70 वर्षीय शकुन रानी ने दो महीने में दो बार वोटर के रूप में पंजीकरण कराया। उन्होंने दावा किया था कि शकुन रानी ने Form 6 का दुरुपयोग करके अपना नाम दो बार वोटर लिस्ट में डलवाया।
राहुल गांधी ने कहा था, “शकुन रानी की कहानी बताता हूं। वो 70 साल की उम्र में पहली बार वोटर बनी। उसने Form 6 का इस्तेमाल किया और कुछ महीने बाद फिर Form 6 का इस्तेमाल किया। उसका नाम वोटर लिस्ट में दो बार है।”
चुनाव आयोग ने आज इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। EC ने स्पष्ट किया, “चुनाव आयोग की जांच में पाया गया कि शकुन रानी ने केवल एक बार वोट डाला, राहुल गांधी के दावे के अनुसार दो बार नहीं।”
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी द्वारा दिखाए गए दस्तावेज़ों पर भी सवाल उठाए हैं। EC ने 5-सूत्रीय जवाब में कहा, “आपके द्वारा दिखाया गया दस्तावेज़ पोलिंग ऑफिसर द्वारा जारी किया गया दस्तावेज़ नहीं है।”
राहुल गांधी ने प्रेजेंटेशन में टिक मार्क्स वाला एक पेपर दिखाया था और दावा किया था कि ये पोलिंग बूथ ऑफिसर का है। लेकिन EC ने इसे फर्जी बताया।
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को नोटिस भेजा है और कहा है कि वे “प्रासंगिक दस्तावेज़ उपलब्ध कराएं जिसके आधार पर उन्होंने ये दावा किया कि श्रीमती शकुन रानी या कोई और व्यक्ति दो बार वोट डाल सकता है।”
EC ने पहले भी राहुल गांधी से कहा था कि वे या तो अपने आरोपों को शपथ के साथ पेश करें या राष्ट्र से माफी मांगें।
भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीया ने कहा, “अगर राहुल गांधी अपनी विश्वसनीयता को बनाए रखना चाहते हैं, तो उन्हें Registration of Electors Rules, 1960 के Rule 20(3)(b) के अनुसार Declaration/Oath के तहत उन अपात्र मतदाताओं के नाम जमा करने चाहिए।”
सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी गठबंधन सोमवार को संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेगा।
उसी दिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इंडिया गठबंधन के सांसदों के लिए डिनर की मेजबानी करेंगे।
यह विवाद बिहार में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान चुनावी सूची के संशोधन को लेकर भी है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर चुनावी हेराफेरी कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने पहले भी दावा किया था कि उनकी पार्टी ने डिजिटल वोटर लिस्ट और CCTV फुटेज मांगा था लेकिन EC ने नहीं दिया। उन्होंने कहा था, “फिर हमने अपनी जांच की, RTI फाइल की और डेटा मिला। सच्चाई यह है कि चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर चुनाव चुरा रहे हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद भारत की चुनावी प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, बिना ठोस सबूतों के ऐसे आरोप लगाना संस्थानों की साख को नुकसान पहुंचा सकता है।
चुनाव आयोग और राहुल गांधी के बीच यह विवाद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर मामला है। अब देखना होगा कि राहुल गांधी क्या सबूत पेश करते हैं या माफी मांगते हैं।
महत्वपूर्ण नोट: यह लेख समसामयिक घटनाओं पर आधारित है और सभी पक्षों के विचारों को शामिल करने की कोशिश की गई है।
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