ढाई साल में एक भी क्लास-3 परीक्षा नहीं, CBT न हो पाने पर OMR विकल्प की भी नहीं सुनी सरकार
हिमाचल में क्लास-3 की नौकरियों पर ब्रेक: हिमाचल प्रदेश में सरकारी नौकरियों का इंतजार कर रहे युवाओं के सब्र का बाँध अब टूटता जा रहा है। हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (HPRCA) द्वारा क्लास-3 भर्तियों की न कोई परीक्षा करवाई गई और न ही कोई परिणाम दिया गया।
अब जब आयोग ने TGT के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की है और 17 जुलाई 2025 तक आवेदन मांगे गए हैं, उसके बाद लगभग 1800 पदों पर JBT भर्ती की प्रक्रिया शुरू होनी है। लेकिन इसमें भी सीडैक (C-DAC) के साथ एमओयू साइन न हो पाने के कारण प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
ढाई साल से युवा कर रहे हैं सरकार से गुहार – लेकिन सरकार ‘मौन’
प्रदेशभर के हजारों अभ्यर्थी पिछले साल से सरकार से लगातार अपील कर रहे हैं कि यदि CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) कराना संभव नहीं है, तो कुछ समय के लिए OMR आधारित परीक्षा प्रणाली ही लागू कर ली जाए — जैसे HPPSC (लोक सेवा आयोग) करता है।
लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। न तो कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है और न ही युवाओं के सुझावों पर विचार किया जा रहा है। आयोग और सरकार की यह उदासीनता युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसी बन चुकी है।
हिमाचल में क्लास-3 की नौकरियों पर ब्रेक: कांग्रेस ने किया था 5 लाख नौकरियों का वादा
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणापत्र में हर साल 1 लाख रोजगार और 5 साल में 5 लाख नौकरियां देने का वादा किया था। इन वादों पर भरोसा कर युवाओं ने कांग्रेस को भारी समर्थन दिया, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पिछले ढाई साल में राज्य चयन आयोग एक भी क्लास-3 परीक्षा आयोजित नहीं कर सका।
अब युवाओं को लगने लगा है कि यह वादा सिर्फ चुनावी जुमला बनकर रह गया है।
लाइब्रेरी में सालों से तैयारी कर थक चुके हैं छात्र
- छात्र लगातार 2.5 साल से पढ़ाई कर रहे हैं – कभी सोचकर कि अगले 2-3 महीने में परीक्षा होगी।
- उन्होंने नौकरी छोड़कर, निजी खर्च पर, लाइब्रेरी में दिन-रात तैयारी की, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया।
- मानसिक थकान, आर्थिक दबाव और अब न्याय की उम्मीद भी खत्म होती जा रही है।
अब TGT और JBT दोनों परीक्षाएं अधर में
- TGT भर्ती ( hp tgt commission 2025) के लिए 17 जुलाई तक आवेदन मांगे गए हैं।
- इसके यानि 18 जुलाई से लगभग 1800 JBT पदों ( hp jbt commission 2025) की अधिसूचना संभावित है।
- लेकिन सीडैक से MOU नहीं हुआ, इसलिए परीक्षा करवाने की प्रक्रिया ठप है।
C-DAC क्या है और यह परीक्षा कैसे करवाता है?
सीडैक (Centre for Development of Advanced Computing – C-DAC) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एक प्रतिष्ठित तकनीकी संगठन है। यह संस्था देशभर में कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं (CBT) करवाने के लिए जानी जाती है।
C-DAC की परीक्षाएं पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और सुरक्षित प्रणाली के माध्यम से आयोजित की जाती हैं। इसमें:
- परीक्षार्थियों को निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर सिस्टम दिए जाते हैं।
- प्रश्नों की रैंडमाइजेशन तकनीक के जरिए अलग-अलग सेट तैयार होते हैं ताकि नकल की गुंजाइश न हो।
- परीक्षा के तुरंत बाद उत्तरों की सेंटरलाइज प्रोसेसिंग होती है जिससे परिणाम में पारदर्शिता बनी रहती है।
कई राज्यों में C-DAC पहले से लोक सेवा आयोगों, विश्वविद्यालयों व अन्य सरकारी संस्थानों के साथ सफलतापूर्वक परीक्षाएं आयोजित कर चुका है। HPRCA भी इसी तर्ज पर उससे अनुबंध करना चाहता है — लेकिन जब तक एमओयू साइन नहीं होता, तब तक कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।
CBT और OMR आधारित परीक्षाओं में अंतर क्या है?
| विशेषता | CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) | OMR (पारंपरिक ऑफ़लाइन परीक्षा) |
|---|---|---|
| माध्यम | कंप्यूटर | कागज आधारित उत्तर पुस्तिका |
| प्रश्नों का वितरण | स्क्रीन पर प्रश्न, एक समय में एक प्रश्न | सभी प्रश्न एक साथ प्रश्नपत्र में |
| उत्तर देने का तरीका | माउस या कीबोर्ड से उत्तर का चयन | OMR शीट में गोले भरना |
| सुरक्षा | अधिक सुरक्षा, डेटा एन्क्रिप्शन | कम सुरक्षा, पेपर लीक की संभावना |
| परिणाम प्रोसेसिंग | तेज़ और स्वचालित | धीमा, मैन्युअल या स्कैनिंग आधारित |
| खर्च और संसाधन | ज़्यादा तकनीकी संसाधन चाहिए | कम तकनीकी आवश्यकता, अधिक स्टाफ |
| नकल की संभावना | बहुत कम | तुलनात्मक रूप से अधिक |
👉 CBT आधुनिक और तेज़ है लेकिन इसके लिए तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है। OMR प्रणाली कम लागत वाली है लेकिन उसमें गड़बड़ी की संभावना अधिक रहती है।
सरकार कब जागेगी?
हिमाचल में सरकारी भर्तियों की स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। युवाओं ने चुनाव में भरोसा जताया, लेकिन सरकार द्वारा न तो CBT करवाया गया, और न ही OMR वैकल्पिक रास्ता अपनाया गया।
सरकार अब आउटसोर्सिंग की राह पर?
भर्तियों में सुस्ती के इस दौर में सरकार अब शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य विभागों में आउटसोर्स आधारित भर्तियां करने पर ज़ोर दे रही है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि युवाओं को अब स्थायी सरकारी नौकरी की जगह ठेके पर काम करना पड़ेगा, जहाँ उन्हें ₹10,000 से ₹12,000 के मामूली वेतन पर पूरी उम्र काम करना पड़ सकता है।
- इन नौकरियों में न तो नौकरी की सुरक्षा होती है, न ही भविष्य में स्थायीत्व की कोई गारंटी।
- कर्मचारियों को छुट्टी, पीएफ, मेडिकल जैसे लाभ भी नहीं मिलते, और उन्हें कभी भी हटाया जा सकता है।
युवाओं में इस बात को लेकर रोष है कि जिस सरकार ने हर साल लाखों नौकरियां देने का वादा किया था, वह अब स्थायीत्व की जगह अस्थायीत्व और शोषण वाली व्यवस्था लागू कर रही है।
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