महीने में 5 से 15 हजार रुपए तक का नुकसान, कर्मचारी संघों ने किया प्रदर्शन की चेतावनी
शिमला, 8 सितंबर 2025: हिमाचल प्रदेश सरकार का एक निर्णय राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश सिविल सर्विसेज (रिवाइज़्ड पे) रूल्स 2022 से Rule 7A को हटा दिया है। यह बदलाव 3 जनवरी 2022 से पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया है।
14,000 कर्मचारी होंगे प्रभावित
इस संशोधन से राज्य के लगभग 14,000 कर्मचारी प्रभावित होंगे। पे स्केल के रि-फिक्सेशन के बाद इन कर्मचारियों को प्रति माह 5,000 से 15,000 रुपए तक का नुकसान हो सकता है। यह बदलाव 1 जनवरी 2016 से प्रभावी होगा।
Rule 7A क्या था?
Rule 7A राज्य सरकारी कर्मचारियों के वेतन निर्धारण से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रावधान था जो कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन लाभ प्रदान करता था। इस नियम के तहत कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान में बेहतर फिक्सेशन का लाभ मिलता था।
वित्त विभाग की अधिसूचना
हिमाचल प्रदेश के वित्त (पे रिविज़न) विभाग द्वारा जारी की गई अधिसूचना के अनुसार, “हिमाचल प्रदेश सिविल सर्विसेज (रिवाइज़्ड पे) सेकंड अमेंडमेंट रूल्स 2025” के तहत यह परिवर्तन किया गया है।
कर्मचारी संघों की प्रतिक्रिया
राज्य कर्मचारी संघों ने इस फैसले को कर्मचारी विरोधी बताया है और कहा है कि यह निर्णय बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन को जन्म देगा। कर्मचारी संघ सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत में जुटे हैं और उन्हें इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह कर रहे हैं।
कर्मचारियों पर आर्थिक प्रभाव
इस नियम को हटाने से:
- प्रति माह 5,000 से 15,000 रुपए तक की सैलरी में कटौती
- पूर्वव्यापी प्रभाव से वर्षों का वेतन भुगतान प्रभावित
- कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में गिरावट
- परिवारिक बजट पर नकारात्मक असर
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
यह निर्णय हिमाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। राज्य के हजारों सरकारी कर्मचारी और उनके परिवार इस फैसले से नाराज़ हैं, जो आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए समस्या बन सकता है।
आने वाली चुनौतियां
- बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की संभावना
- कार्य बहिष्कार का खतरा
- न्यायालयी चुनौती की आशंका
- राजनीतिक दबाव में वृद्धि
विपक्ष की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
अभी तक विपक्षी दलों की इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अनुमान है कि भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियां इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं।
सरकार का पक्ष
अभी तक हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस निर्णय के पीछे के कारणों को स्पष्ट नहीं किया है। संभावित रूप से यह राज्य के वित्तीय संकट को देखते हुए लिया गया निर्णय हो सकता है।
Rule 7A को हटाने का यह फैसला हिमाचल प्रदेश में एक बड़े विवाद का कारण बन सकता है। 14,000 कर्मचारियों की सैलरी में भारी कटौती न केवल उनके जीवन स्तर को प्रभावित करेगी बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति को भी बदल सकती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कर्मचारी संघों और सरकार के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है।
कर्मचारी संघों की चेतावनी के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस दबाव के सामने अपना रुख बदलती है या अपने फैसले पर अड़ी रहती है।
यह समाचार विश्वसनीय स्रोतों और आधिकारिक अधिसूचनाओं पर आधारित है। स्थिति में आने वाले बदलावों की जानकारी अपडेट की जाती रहेगी।





