जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद हुआ विशेष चुनाव
भारत में 9 सितंबर 2025 को जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के कारण इस्तीफा देने के बाद समयपूर्व उपराष्ट्रपति चुनाव आयोजित किया गया। यह भारत का 17वां उपराष्ट्रपति चुनाव है, जो संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार आयोजित किया गया।
चुनाव की तारीख और समय
चुनाव आयोग ने घोषणा की थी कि उपराष्ट्रपति का चुनाव 9 सितंबर को होगा और मतगणना उसी दिन शाम 6 बजे से शुरू होगी। मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ और परिणाम शाम 6 बजे के बाद घोषित होने की उम्मीद है।
उम्मीदवार और राजनीतिक गठबंधन
BJP के नेतृत्व वाले NDA ने महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि INDIA गठबंधन ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन किया है।
पिछले चुनाव का रिकॉर्ड
2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ ने 528 वोट (74.37 प्रतिशत) प्राप्त किए थे और अपनी प्रतिद्वंद्वी मार्गरेट आल्वा को 346 वोटों के विशाल अंतर से हराया था, जिन्हें केवल 182 वोट (25.63 प्रतिशत) मिले थे।
चुनाव प्रक्रिया की जानकारी
निर्वाचक मंडल
उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67 के तहत संचालित होती है।
नामांकन प्रक्रिया
चुनाव की अधिसूचना 7 अगस्त को जारी की गई थी, और इच्छुक उम्मीदवार 21 अगस्त तक अपना नामांकन दाखिल कर सकते थे। नामांकन पत्र संसद भवन के कमरा संख्या RS-28, प्रथम तल पर सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक जमा किए जा सकते थे।
प्रधानमंत्री का मतदान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 2025 उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना मत डाला। सभी प्रमुख राजनीतिक नेताओं ने संसद भवन परिसर में मतदान में भाग लिया।
संवैधानिक महत्व
भारतीय संविधान के अनुसार, उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं और राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
परिणाम की प्रतीक्षा
मतगणना शाम 6 बजे से शुरू होने वाली है और भारत के नए उपराष्ट्रपति का नाम जल्द ही घोषित होने की उम्मीद है। यह चुनाव भारतीय लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है, जहां संवैधानिक पदों का चुनाव निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय पर किया जाता है।
2025 का उपराष्ट्रपति चुनाव भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना है। जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद आयोजित यह विशेष चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निरंतरता को बनाए रखता है। परिणाम की घोषणा के साथ ही भारत को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा।





