मनोरंजन

मायासभा निर्देशक देवा कट्टा का खुलासा: 90 दिन की शूटिंग में 20,000 एक्स्ट्रा कलाकारों को संभालना था सबसे बड़ी चुनौती

मुख्य बिंदु

  • तेलुगू सीरियल ‘मायासभा’ की 90 दिन की शूटिंग में कई चुनौतियां
  • 20,000 एक्स्ट्रा कलाकारों के साथ काम करना था सबसे कठिन
  • स्टार कास्ट के शेड्यूल को मैनेज करना भी था बड़ा मुद्दा

मुंबई: SonyLIV पर स्ट्रीम हो रही तेलुगू सीरियल ‘मायासभा – राइज ऑफ द टाइटन्स’ के निर्देशक देवा कट्टा ने अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया है। एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने 90 दिन की मैराथन शूटिंग में कई मुश्किलों का सामना किया।

सबसे बड़ी चुनौती: 20,000 एक्स्ट्रा कलाकार

देवा कट्टा ने बताया कि सीरियल में राजनीतिक रैलियों के दृश्यों के लिए उन्हें लगभग 20,000 एक्स्ट्रा कलाकारों के साथ काम करना पड़ा। निर्देशक के अनुसार, “जैसे ही कहानी राजनीतिक परिदृश्य में प्रवेश करती है, आप देखेंगे कि स्केल तेज़ी से बढ़ता जाता है। हमें बिना किसी समझौते के वह अनुभव बनाना था।”

भीड़ को मैनेज करना इतना मुश्किल था कि कई जगह उन्हें CGI का सहारा लेना पड़ा। यह दिखाता है कि आज के समय में बड़े प्रोडक्शन में तकनीक का महत्व कितना बढ़ गया है।

स्टार कास्ट के शेड्यूल की समस्या

मुख्य कलाकार आदि पिनिसेट्टी और चैतन्य राव ने तो पूरा समय दिया, लेकिन अन्य बड़े कलाकारों के साथ दिक्कत हुई। देवा कट्टा ने कहा, “हमें नासिर सर, साईं कुमार सर, दिव्या दत्ता जी, रवींद्र विजय जैसे व्यस्त कलाकारों के साथ काम करना था। उन सभी के बीच तालमेल बिठाना पहली सबसे बड़ी चुनौती थी।”

7 साल की मेहनत का नतीजा

2017-2018 से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे देवा कट्टा ने बताया कि पूरी लेखन प्रक्रिया में एक साल लगा। उन्होंने अपने साझीदार किरण जय कुमार के साथ मिलकर इस सीरियल को तैयार किया। देवा कट्टा के अनुसार, “प्री-प्रोडक्शन में 5 महीने, शूटिंग में 7 महीने, और पोस्ट-प्रोडक्शन में 5 महीने लगे।”

थिएटर से तलाशे गए कलाकार

दिलचस्प बात यह है कि देवा कट्टा और उनकी टीम ने स्थानीय थिएटर से भी कलाकार ढूंढे। उन्होंने ‘पाकुदुराल्लु’ नामक एक स्टेज प्ले देखा और तुरंत बैकस्टेज जाकर उन कलाकारों को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया।

बजट की व्यवस्था

प्रोड्यूसर कृष्णा विजय के बिना यह प्रोजेक्ट संभव नहीं था। देवा कट्टा ने कहा, “वे ऐसे व्यक्ति हैं जो स्क्रिप्ट की मांग को कभी मना नहीं करते। वे सिर्फ बजट के अंदर इसे करने के रचनात्मक तरीके खोजते हैं।”

‘मायासभा’ की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही योजना, मेहनत और टीमवर्क से कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट पूरा किया जा सकता है। 90 दिन की इस मैराथन शूटिंग ने भारतीय मनोरंजन इंडस्ट्री में एक नया मानदंड स्थापित किया है।

लेखक का नोट: यह लेख देवा कट्टा के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू पर आधारित है और फिल्म इंडस्ट्री में बड़े प्रोजेक्ट्स की चुनौतियों को समझने में मदद करता है।


News Ka Store Team

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