तेलुगु सिनेमा के युवा अभिनेता तेजा सज्जा और निर्देशक कार्तिक गत्तमनेनी की महत्वाकांक्षी फिल्म ‘मिराई’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह सुपरहीरो फंतासी फिल्म तकनीकी रूप से प्रभावशाली है लेकिन कहानी कहने में भावनात्मक जुड़ाव की कमी झलकती है।
फिल्म की मूल कहानी
168 मिनट की यह फिल्म एक ऐसे सुपरहीरो की कहानी है जिसे नौवें ग्रंथ और दुनिया को एक अंधेरी शक्ति से बचाना है। कहानी सम्राट अशोक के समय से शुरू होती है, जो कलिंग युद्ध के बाद व्यथित है।
मुख्य कलाकार:
- तेजा सज्जा – वेद (मुख्य किरदार)
- मंचू मनोज – खलनायक (काली तलवार वाला)
- रितिका नायक – विभा (युवा साध्वी)
- श्रिया सरन – माता का किरदार
- जगपति बाबू – बुजुर्ग संरक्षक
- जयराम – ऋषि अगस्त्य
कहानी का विश्लेषण
फिल्म की शुरुआत एनिमेशन के साथ होती है जो इसकी दुनिया को स्थापित करती है। कहानी के अनुसार, नौ ग्रंथों की रक्षा करने वाला एक गुप्त समाज है – ये ग्रंथ अपार शक्ति वाली पुस्तकें हैं जो गलत हाथों में पड़ने पर दुनिया को नष्ट कर सकती हैं।
कहानी की मुख्य समस्याएं:
- पहले घंटे में धीमी गति: फिल्म एक घंटे से अधिक समय तक अपनी पकड़ नहीं बना पाती
- कई पात्रों का अचानक प्रवेश: विभिन्न सेटिंग्स में अनेक किरदारों का अव्यवस्थित प्रवेश
- तात्कालिकता की कमी: ग्रंथों को होने वाले खतरे की गंभीरता दर्शकों तक पहुंचाने में असफलता
तकनीकी पक्ष – फिल्म की मजबूती
विजुअल इफेक्ट्स और आर्ट डिरेक्शन:
- सिनेमैटोग्राफर-निर्देशक कार्तिक गत्तमनेनी ने प्रोडक्शन डिज़ाइनर नागेंदर तंगला के साथ मिलकर शानदार विजुअल एस्थेटिक तैयार किया है
- आर्ट डिरेक्टर दासीरेड्डी श्रीनिवास और कुशल विजुअल इफेक्ट्स टीम का बेहतरीन काम
- फिल्म में ‘कल्कि 2898 AD’ की तरह का डिस्टोपियन काशी का सेट तैयार किया गया है
कमजोर पक्ष:
- पैराडाइज स्क्रैपयार्ड एक जीवंत ब्रह्मांड की बजाय केवल एक सेट लगता है
- विभा और वेद के बीच औपचारिक बातचीत
- दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव की कमी
अभिनय का आकलन
मुख्य कलाकारों का प्रदर्शन:
तेजा सज्जा:
- आम आदमी की अपील के साथ शक्ति और कमजोरी के बीच संतुलन बनाते हैं
- एक्शन सीन्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन
- सुपरहीरो के रूप में विश्वसनीय
मंचू मनोज:
- खलनायक के रूप में शारीरिक खतरा दिखाने में सफल
- काली तलवार के साथ प्रभावी उपस्थिति
श्रिया सरन:
- फिल्म की सबसे बड़ी खोज
- संघर्षशील माता के रूप में भावनात्मक गहराई के साथ
- विशेषकर फिल्म के उत्तरार्ध में शानदार अभिनय
हनुमान से तुलना
तेजा सज्जा की पिछली फिल्म ‘हनुमान’ (निर्देशक प्रसंत वर्मा) के साथ तुलना अवश्यंभावी है:
हनुमान की सफलता:
- आकर्षक किरदार
- भावनात्मक गहराई
- दर्शकों का अंडरडॉग हीरो के साथ जुड़ाव
मिराई की कमियां:
- बड़े बजट के बावजूद भावनात्मक कनेक्शन की कमी
- व्यापक कैनवास लेकिन कहानी की सतही प्रस्तुति
फिल्म के मजबूत बिंदु
बेहतर पहलू:
- दूसरे हाल्फ में सुधार: जब डार्क फोर्स की बैकस्टोरी और मां-बेटे का आर्क पूरी तरह सामने आता है
- वेद की हिमालयी यात्रा: रहस्यमय स्टाफ ‘मिराई’ की खोज
- ऋषि अगस्त्य से मुलाकात: जयराम का गंभीर अभिनय
समीक्षकों की राय
फिल्म को लेकर समीक्षकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है:
सकारात्मक पहलू:
- शानदार विजुअल इफेक्ट्स
- तकनीकी उत्कृष्टता
- एक्शन सीक्वेंसेस
नकारात्मक पहलू:
- कहानी में भावनात्मक गहराई का अभाव
- धीमी शुरुआत
- पात्रों के बीच सतही बातचीत
भारतीय महाकाव्य परंपरा और आधुनिक सिनेमा
भारतीय महाकाव्य भक्ति भावना से भरपूर कल्पनाओं से समृद्ध हैं – देवता, राक्षस, अंधकार के कगार पर खड़ी दुनिया, और अच्छाई की बुराई पर विजय। हालांकि, मुख्य बात यह है कि ऐसी कहानियों को पर्दे पर भावनात्मक रूप से प्रभावी कहानी में बदलना।
बॉक्स ऑफिस की उम्मीदें
फिल्म के व्यापक रिलीज और तेजा सज्जा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन की उम्मीद है, खासकर:
- सुपरहीरो फिल्मों के प्रति बढ़ता रुझान
- तकनीकी गुणवत्ता
- युवा दर्शकों में तेजा सज्जा की लोकप्रियता
‘मिराई’ एक महत्वाकांक्षी प्रयास है जो तकनीकी रूप से प्रभावशाली है लेकिन कहानी कहने में पूर्णता हासिल नहीं कर पाती। फिल्म के दूसरे हाल्फ में सुधार आता है, लेकिन तब तक शुरुआती नुकसान हो चुका होता है।
सुझाव: यदि आप विजुअल स्पेक्टेकल और एक्शन के शौकीन हैं तो देख सकते हैं, लेकिन भावनात्मक कहानी की उम्मीद न रखें।
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