मुख्य समाचार
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में सेब की बढ़ती आपूर्ति के कारण कीमतों में तेज गिरावट देखी जा रही है। भट्ठाकुफर फल मंडी में एक सप्ताह के भीतर सेब के दाम 800 से 1000 रुपये प्रति पेटी तक गिर गए हैं, जिससे स्थानीय बागवान चिंतित हैं।
वर्तमान बाजार स्थिति
दाम में गिरावट की स्थिति
- पिछले सप्ताह: ए ग्रेड सेब (20 किलो) – 2,200 से 2,500 रुपये प्रति पेटी
- वर्तमान दर: 1,400 से 1,500 रुपये प्रति पेटी
- गिरावट: 800-1000 रुपये प्रति पेटी
मुख्य किस्में बाजार में
फल मंडी में इन दिनों निम्नलिखित किस्मों की आपूर्ति हो रही है:
- रॉयल सेब (सबसे अधिक मात्रा में)
- गोल्डन सेब
- स्पर सेब
- गाला सेब
बागवानों की चुनौतियां
उत्पादन लागत विश्लेषण
स्थानीय बागवान सुरेंद्र चौहान के अनुसार, एक पेटी सेब के उत्पादन में निम्न खर्च आता है:
- खाद की लागत
- कीटनाशक स्प्रे
- मजदूरी
- कुल खर्च: लगभग 750 रुपये प्रति पेटी
मौसमी प्रभाव
- निचले और मध्यम इलाकों के सेब को बेहतर दाम मिलते हैं
- ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब सीजन शुरू होते ही दाम गिर जाते हैं
- बागवानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता
बाजार विश्लेषण
गुणवत्ता की समस्या
आढ़तियों के मुताबिक:
- मंडी में ज्यादातर पतझड़ वाला (निम्न गुणवत्ता) सेब आ रहा है
- खरीदार इस सेब में रुचि नहीं दिखा रहे
- निजी कंपनियों के बेहतर रेट के कारण अच्छी गुणवत्ता का सेब मंडी में कम पहुंच रहा
व्यापारिक प्रभाव
- कारोबार में समग्र गिरावट
- गुणवत्ता के अनुसार ही दाम मिल रहे हैं
- बाजार में अनिश्चितता का माहौल
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों की राय
प्रताप चौहान (प्रधान, भट्ठाकुफर फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन) के अनुसार:
- आने वाले दिनों में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद
- मंडी में अच्छी गुणवत्ता के सेब पहुंचने की संभावना
- बागवानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद
सुझाव और समाधान
बागवानों के लिए सुझाव
- गुणवत्ता सुधार: बेहतर कृषि तकनीक अपनाएं
- समय प्रबंधन: सही समय पर तुड़ाई और बिक्री करें
- सामूहिक विपणन: आढ़तियों के साथ बेहतर समझौता करें
सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता
- न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था
- कोल्ड स्टोरेज की सुविधा
- प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा
शिमला में सेब की कीमतों में गिरावट एक चिंताजनक स्थिति है जो स्थानीय बागवानों की आजीविका को प्रभावित कर रही है। हालांकि बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव सामान्य है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है। गुणवत्ता सुधार, बेहतर मार्केटिंग रणनीति और सरकारी सहायता से इस समस्या का समाधान संभव है।





